शारदीय नवरात्रि 2026: आज से मां दुर्गा की आराधना शुरू, जानें घटस्थापना के मुहूर्त, नौ देवियों की पूजा विधि और व्रत के नियम

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नवरात्रि 2025: जानें कलश स्थापना विधि, व्रत नियम और मुहूर्त

Navratri 2025: नवरात्र में घटस्थापना के समय भूलकर भी न करें ये 4 गलतियां, खंडित कलश देगा नुकसान - navratri 2025 maa durga puja ghatasthapana niyam kalash sthapna rule tvisz - AajTak

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फोटो: मां दुर्गा की प्रतिमा और नवरात्रि घटस्थापना की प्रतीकात्मक तस्वीरें

जयपुर, 11 अक्टूबर 2026। शारदीय नवरात्रि की शुरुआत आज रविवार से हो गई है। अगले नौ दिनों तक देशभर में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाएगी। नवरात्रि के पहले दिन घरों और मंदिरों में घटस्थापना यानी कलश स्थापना के साथ मां शैलपुत्री की आराधना की जाती है। इस बार नवरात्रि में तिथियों के विशेष संयोग के कारण 19 अक्टूबर को अष्टमी और नवमी की पूजा तथा 20 अक्टूबर को विजयादशमी यानी दशहरा मनाया जाएगा।

नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना के लिए सुबह का शुभ मुहूर्त और दोपहर में अभिजीत मुहूर्त महत्वपूर्ण माना गया है। भक्त पूजा की तैयारियों में जुटे हैं। आइए जानते हैं घटस्थापना का शुभ समय, नौ दिनों का पूजा कैलेंडर, कलश स्थापना की विधि और व्रत रखने के जरूरी नियम।

घटस्थापना का शुभ मुहूर्त

पंचांग के अनुसार, 11 अक्टूबर को शारदीय नवरात्रि की शुरुआत प्रतिपदा तिथि से हुई है। घटस्थापना के लिए अलग-अलग पंचांगों में समय में थोड़ा अंतर मिल सकता है।

  • सुबह का मुहूर्त: सुबह 6:19 बजे से 10:12 बजे तक।

  • अभिजीत मुहूर्त: सुबह के मुहूर्त में पूजा नहीं कर पाने वाले श्रद्धालु दोपहर के अभिजीत मुहूर्त में घटस्थापना कर सकते हैं। दिल्ली के लिए प्रकाशित समय सुबह 11:44 से दोपहर 12:31 बजे तक है।

जयपुर और राजस्थान के दूसरे शहरों में सूर्योदय के समय के अनुसार मुहूर्त में अंतर हो सकता है। इसलिए स्थानीय पंचांग के अनुसार समय की पुष्टि करना उचित रहेगा।

घटस्थापना की पूजा विधि

नवरात्रि के पहले दिन पूजा स्थल की साफ-सफाई करके मां दुर्गा की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। इसके बाद विधि-विधान से कलश स्थापना करें।

  1. पूजा स्थल को साफ करके चौकी पर लाल या साफ कपड़ा बिछाएं।

  2. मिट्टी के पात्र में साफ मिट्टी डालकर उसमें जौ बोएं।

  3. कलश में जल भरें और परंपरा के अनुसार उसमें सुपारी, अक्षत, सिक्का आदि रखें।

  4. कलश के मुख पर आम या अशोक के पत्ते लगाकर ऊपर नारियल स्थापित करें।

  5. कलश को पूजा स्थल पर रखकर मां दुर्गा का आह्वान करें।

  6. मां शैलपुत्री को फूल, अक्षत, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें।

  7. दुर्गा चालीसा, दुर्गा सप्तशती या मां के मंत्रों का पाठ करके आरती करें।

धार्मिक परंपराओं के अनुसार, नवरात्रि के दौरान अखंड ज्योत भी जलाई जाती है। यदि अखंड ज्योत जलाएं तो उसकी सुरक्षित व्यवस्था करना जरूरी है।

नौ दिनों में किस देवी की पूजा होगी?

नवरात्रि के प्रत्येक दिन मां दुर्गा के एक स्वरूप की आराधना की जाती है। इस वर्ष का पूजा कैलेंडर इस प्रकार है:

तारीख पूजा और तिथि
11 अक्टूबर मां शैलपुत्री
12 अक्टूबर मां ब्रह्मचारिणी
13 अक्टूबर मां चंद्रघंटा
14 अक्टूबर मां कूष्मांडा
15 अक्टूबर मां स्कंदमाता
16 अक्टूबर मां कात्यायनी
17 अक्टूबर मां कालरात्रि की पूजा परंपरा
18 अक्टूबर सप्तमी तिथि जारी रहने के कारण स्थानीय पंचांग के अनुसार पूजा
19 अक्टूबर अष्टमी-नवमी की पूजा, मां महागौरी और मां सिद्धिदात्री की आराधना
20 अक्टूबर विजयादशमी और दशहरा

इस वर्ष तिथियों के विशेष संयोग के कारण पूजा की परंपरा और तिथि-निर्णय में स्थानीय पंचांग की भूमिका महत्वपूर्ण है। अष्टमी, नवमी और कन्या पूजन का समय तय करने से पहले अपने क्षेत्र के पंचांग की जानकारी जरूर लें।

नवरात्रि व्रत के नियम: क्या खाएं और किन बातों का रखें ध्यान?

नवरात्रि में श्रद्धालु अपनी आस्था, स्वास्थ्य और पारिवारिक परंपरा के अनुसार व्रत रखते हैं। कुछ लोग पूरे नौ दिन उपवास करते हैं, जबकि कुछ पहले और आखिरी दिन या निर्धारित दिनों में व्रत रखते हैं।

व्रत के दौरान इन बातों का ध्यान रखा जा सकता है:

  • फल, दूध, दही, मेवे और व्रत में अनुमत खाद्य पदार्थों का सेवन करें।

  • सेंधा नमक का उपयोग अपनी व्रत-परंपरा के अनुसार करें।

  • अनाज, प्याज, लहसुन और अन्य खाद्य पदार्थों को लेकर अपने परिवार की धार्मिक परंपरा का पालन करें।

  • पर्याप्त पानी पिएं और लंबे समय तक भूखे रहने से बचें।

  • मधुमेह, गर्भावस्था या अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं में उपवास रखने से पहले चिकित्सकीय सलाह लें।

  • पूजा स्थल की साफ-सफाई रखें और दीपक जलाते समय अग्नि सुरक्षा का ध्यान रखें।

देवी भागवत पुराण सहित विभिन्न धार्मिक ग्रंथों और परंपराओं में नवरात्रि व्रत के अलग-अलग विधान मिलते हैं। कुछ परंपराओं में पूरे नौ दिन व्रत संभव न होने पर तीन दिन उपवास करने का विकल्प भी बताया जाता है। इसके लिए श्रद्धालु अपने परिवार की परंपरा या विद्वान से मार्गदर्शन ले सकते हैं।

19 अक्टूबर को अष्टमी-नवमी, 20 अक्टूबर को दशहरा

इस बार नवरात्रि के दौरान तिथियों का विशेष क्रम रहने के कारण अष्टमी और नवमी की पूजा 19 अक्टूबर को की जाएगी। वहीं, 20 अक्टूबर को विजयादशमी यानी दशहरा मनाया जाएगा। दशहरा बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक माना जाता है।

नवरात्रि के इन दिनों में मंदिरों में विशेष पूजा, भजन-कीर्तन, दुर्गा सप्तशती का पाठ और कन्या पूजन जैसे धार्मिक आयोजन किए जाते हैं। भक्त मां दुर्गा से सुख, समृद्धि, शांति और परिवार की खुशहाली की कामना करते हैं।

नोट: पूजा के मुहूर्त और तिथि संबंधी जानकारी स्थान के अनुसार बदल सकती है। धार्मिक अनुष्ठान से पहले स्थानीय पंचांग से पुष्टि करें।

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